Sunday, April 4, 2010

सच्ची इबादत वही जो सब कुछ भुला दे



इबादत हो, पूजा हो या कोई अन्य काम। इस कदर मन लगाया जाए कि सिवाए उसके किसी और का जरा भी ख्याल न रहे। उसके सिवा सब कुछ भूल जाए। फिर किसी और चीज के होने का मतलब ही खत्म हो जाए। अर्जुन को जब चिडिय़ा की आंख भेदनी थी, तो उसका सारा ध्यान चिडिय़ा की आंख पर था।

एक मुसलमान शासक अपनी सीमा में सिपाहियों के साथ जंगल की तरफ जा रहा था। रास्ते में ही नमाज का समय हो गया। खुदा की इबादत करने के लिए वह रुका तथा जंगल में ही वह नमाज अदा करने लगा। इसी वक्त उसकी जानमाल पर से ही एक लड़की तेजी से भागती हुई निकल गई। उस समय तो उसने कुछ नहीं कहा, नमाज खत्म होते ही उसने अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि- जो कोई भी अभी यहां से गुजरा है, जाओ उसे पकड़ कर मेरे सामने लाओ। थोड़ी देर में ही सिपाहियों ने उस लड़की को पकड़ कर उसके सामने हाजिर कर दिया। नमाजी शासक ने उस लड़की से पूछा- लड़की? तूने मेरी पाक इबादत में खलल डालने की जुर्रत कैसे की? क्या तू देख नहीं रही थी कि मै उस वक्त नमाज पढ़ रहा था? लड़की ने कहा -गुस्ताखी माफ हुजूर! लेकिन मुझे कुछ भी याद नहीं कि मैने आपकी पाक इबादत को जरा भी खराब किया हो। मैं कहां से गुजरी, इसका भी मुझे पता नहीं। वास्तव में, मेरे प्रेमी के आने का वक्त हो गया था मैंं तो केवल अपने प्रेमी से मिलने जा रही थी। इसके अलावा मुझे और कुछ याद नहीं आ रहा।
देखने वाली बात यह है कि खुदा की इबादत करने वाला और वह लड़की जो अपने प्रेमी से मिलने भागी जा रही थी, दोनों की स्थिति किसी हद तक बिल्कुल एक जैसी है। दोनों ही प्रेम में हैं। एक की इबादत का समय हो गया तो वह वहीं नमाज पढऩे लग गया। दूसरी ओर वह लड़की जो अपने प्रेमी से मिलने जाने के लिए बेसुधबुध भागती जा रही थी। दोनों की दीवानगी में थोड़ा फर्क जरूर है। प्रेमिका लड़की की अपने प्रेम के प्रति दीवानगी इस कदर हो जाती है कि वह इसके आगे सब कुछ भुला बैठती है। उसको केवल एक ही चीज याद रहती है कि किसी भी तरह से अपने प्रेमी के पास पहुंचना है। वहीं दूसरी ओर उस मुसलमान शासक की इबादत तो है, परंतु उसको और भी चीजें याद रहती हैं। वह प्रेमिका लड़की जब उस नमाजी शासक से कहती है कि मैं तो केवल एक इंसान की मोहब्बत में इस कदर पागल हो उठी कि मुझे किसी और चीज का जरा भी ख्याल नहीं रहा, मैं तो केवल अपने प्रेम को पाने के लिए ही भागी जा रही थी। आपकी मोहब्बत तो खुदा से है, और आप तो खुदा की पाक इबादत करने में मशगूल थे। माफ करियेगा, आपकी इबादत तो सबसे बढ़कर होनी चाहिए।
खुदा की इबादत हो, भगवान की पूजा या कोई अन्य काम। उसमें इस कदर मन लगाया जाय कि उसके अलावा किसी और का जरा भी ख्याल न रह जाय। स्थिति बिल्कुल वैसी ही हो कि उसके सिवा सब कुछ भुला दे। फिर किसी और चीज के होने का मतलब ही खत्म हो जाए। जब किसी भी काम में तन्मयता व प्रगाढ़ता इस कदर बढ़ती है तो अक्सर ऐसा ही होता है जैसा कि उस प्रेमिका लड़की के साथ हुआ। हम देखते हैं कि जब किसी भी काम में हमारा मन पूरी भाक्ति के साथ प्रयास करता है तब चूक होने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है। अर्जुन को जब चिडिय़ा की आंख को निशाना लगाना था, उस समय उनके समकक्ष और भी कई धनुर्धर मौजूद थे। परंतु, अर्जुन व उन सबके बीच में भी लगभग यही फर्क था। इसी कारण किसी को केवल पेड़ दिखा, किसी को डाल दिखी और किसी को चिडिय़ा भी दिखी। लेकिन, चिडि़य़ा की आंख केवल अर्जुन को ही दिखी। क्योंकि अर्जुन को आंख के सिवा कुछ और याद ही न रहा। अर्जुन ने किसी और चीज को ध्यान ही नहीं दिया। आंख के अलावा कुछ और याद ही नहीं रखा। हम अनुभव करें कि हमने अगर जीवन में पहले कभी इस तरह का प्रयास किया हो, जिसमें कार्य के सिवा किसी और की उपस्थिति ही न हो, और स्थिति यहां तक आती है कि वहां पर अपने होने का भी अर्थ न रहे। मन पूरी तरह से एक ही चीज में रम जाए। इस समय पूरे शरीर की सभी शक्तियां एकजुट हो जाती हैंै, और समग्र शक्ति का रूप ले लेती हैं। पूरे शरीर की ऊर्जा व तमाम शक्तियां एकीकृत होकर केवल एक जगह ही प्रयुक्त होती हैं। अपने अंदर एक ऊर्जा का चक्र निर्मित होता रहता है। फिर बाहर की आवाजों से, शोरगुल से या किसी की भी आवाजाही से अंदर का ध्यान भंग होने का जरा भी खतरा नहीं होता है। जिस तरह से समुद्र की भयंकर लहरें ऊपरी सतह पर कितना ही शोरगुल करती हैं, कितने ही उफान पर होती हैं। लेकिन, इन सबसे समुद्र की भीतरी सतह पर या गहराई में जरा भी फर्क नहीं पड़ता। अंदर से समुद्र बिल्कुल शांत रहता है। उसकी अंदरूनी शांति को ऊपरी लहरें जरा भी भंग नहीं कर पाती हैं। जब कोई भी बात अंदर से जुडऩे लगती है तो बाहरी चीजें भूल ही जाया करती हैं, गहराई में ले जाने से ही बाहरी अड़चनों से छुटकारा मिल सकता है। सच्चे अर्थों में वही पाक इबादत ही हो जाया करती है। प्रेमिका लड़की की बात को वह मुसलमान शासक बहुत अच्छी तरह से समझ गया था तथा अपनी नजरों में ही उसने अपने आपको उस लड़की के मुकाबले बहुत छोटा महसूस करने लगा और अपने लाव-लश्कर के साथ वहां से अपनी सल्तनत के लिए रवाना हो गया।

3 comments:

  1. बेहद सटीक पोस्ट....आजकल तो लोग रट्टा मार प्रवचन दिए जा रहे हैं ..ब्लॉग पर...आप अपना पोस्ट उनके पोस्ट पर चिपका दे...कमेन्ट बौक्स में....
    http://laddoospeaks.blogspot.com/

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  2. शानदार पोस्ट.सच है, वो इबादत ही क्या जिसमें हमारा ध्यान ही न लगा हो.

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